राजस्थान

अध्यादेश की चौतरफा हुई आलोचनाओं के बाद आज विधानसभा में बचाव करती नजर आई राजे सरकार

राजस्थान 23 Oct, 2017 11:17 AM
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राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। विधानसभा का सत्र शुरू होते ही सबसे पहले दिवंगत नेताओं को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। वहीं इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं सदन की बाहर कांग्रेसी विधायकों ने मुंह पर काली पट्‌टी बांधकर सीआरपीसी और आईपीसी के संशोधन बिल का विरोध किया।

इससे पहले विधानसभा में सोमवार को सदन की सदस्य सुश्री कीर्ति कुमारी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल मार्शल अर्जन सिंह, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एन धरम सिंह, सांसद एवं पूर्व विधायक सांवरलाल जाट और चांदनाथ तथा विधानसभा के पूर्व सदस्य घनश्याम जैन, जुगल काबरा, श्री शंभूदयाल बड़गूजर, राव कमलेन्द्र सिंह, मेघराज तावड़, सूरज देवी, प्रभुलाल शर्मा और किशनसिंह भाटी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति और उनके शोकसंतप्त परिजनों को बिछोह सहन करने के लिए शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

इस बिल के खिलाफ हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दायर की गई है याचिका में कहा गया है कि सरकार कानून बनाकर भ्रष्टाचारियों को बचाने की कवायद में जुटी है। बिल पास होने के बाद भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई मुश्किल हो जायेगी।

बचाव करती नजर आई सरकार…
 विपक्ष के शोरशराबे के बीच सरकार बचाव करती नजर आई। वहीं कांग्रेस का अंदाज आक्रामक दिखा। सत्र शुरू हाेने से पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई जिसमें सीएम वसुंधरा राजे ने एकजुटता का मंत्र दिया। इस सत्र में जो विधेयक पेश होने हैं, उसमें लोकसेवकों के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार से मंजूरी लेने संबंधी बिल के अलावा गुर्जर आरक्षण और किसानों की कर्ज माफी का मामला भी सदन में गूंजेगा। सरकार 6 विधेयक सदन में रखेगी। कांग्रेस लोकसेवकों के हित रक्षा वाले विधेयक का विरोध कर रही है।जज, मजिस्ट्रेट और लोकसेवकों के खिलाफ परिवाद पर प्रसंज्ञान, पुलिस जांच या मीडिया रिपोर्टिंग से पहले शासन से मंजूरी लेेने के लिए सरकार 8 सितंबर को ही सीआरपीसी में संशोधन के लिए अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) लागू कर चुकी है। चूंकि अध्यादेश की मियाद 6 महीने होती है और इस बीच विधानसभा सत्र आने पर इसे पटल पर रखना जरूरी होता है, इसलिए सरकार यह बिल ला रही है।

बिल के दायरे में कौन?
 बिल के दायरे में अफसरों के साथ ही नेता भी हैं। सरकार ने इस बिल से पहले जारी किए अध्यादेश में लोकसेवक का दायरा बढ़ा दिया। इसके तहत किसी भी कानून के तहत लोकसेवक कहलाने वाले इसमें शामिल कर दिए। यानी कि पंच-सरपंच से लेकर विधायक तक पर सरकार की मंजूरी के बिना केस दर्ज नहीं हो पाएगा।

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