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आज राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस-पुरूषों में ओरल और महिलाओं में स्तन कैंसर के बढ रहे रोगी

हेल्थ 07 Nov, 2017 10:16 AM
cancer diwas

MM NEWS TV – जयपुर डेस्क / हिमा अग्रवाल — जीवनशैली में आ रहे लगातार परिवर्तन और खान-पान की बदलती आदतों के कारण मानव शरीर कई रोगों से गस्त होता जा रहा है। तेजी से बिगडती जीवनशैली के कारण अब मधुमेह, रक्तचाप के साथ ही कैंसर जैसा रोग भी सामान्य होने लगा है। वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेषन का कहना है कि भारत में हर साल पांच लाख लोग कैंसर से अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। महिला और पुरूषों दोनों में ही साल दर साल कैंसर रोग बढता जा रह है। जहां एक ओर पुरूषों में होठ, मुख और गले के कैंसर के रोग बढते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर महिलाओं में स्तन कैंसर रोगियो की संख्या में इजाफा हो रहा है।

समय पर उपचार की शुरूआत जरूरी जगरूकता की कमी के कारण कैंसर रोगी को अपने रोग की पहचान भी रोग के षरीर में पूरी तरह से फैल जाने के बाद होती है। कैंसर रोग मुख्य रूप से चार अवस्थाओं में होता है। प्रथम और दूसरी अवस्था में रोग की पहचान हो जाने और उपचार की शुरूआत हो जाने पर रोगी को कैंसर मुक्त करना संभव होता है, वहीं तीसरी या अंतिम अवस्था में उपचार की षुरूआत से रोगी की मृत्युदर बढ जाती है। जागरूकता की कमी के कारण देष में अधिकांष रोगियों में रोग की पहचान तीसरी या अंतिम अवस्था में होती है। यही कारण है कि अन्य देषों के मुकाबले भारत में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या सर्वाधिक है।

गलत आदातों से बढ रही है रोगियों की संख्या पुरूषों में होठ, मुँह और गले का कैंसर तेजी से फैल रहा है। आलम यह है कि देष में सर्वाधिक कैंसर के रोगी इसी श्रेणी के है। भगवान महावीर कैंसर चिकित्सालय एंव अनुसंधान क्रेन्द्र के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ नरेश  सोमानी का कहना है कि होठ और मुंह के केैंसर का मुख्य कारण तम्बाकु है। भारतीय पुरूषों में सिगरेट, बीडी के साथ ही खेनी, पान-मसाला खाने की आदत अधिक होती है। यह मुंह के कैंसर का कारण बनता है। खासतौर से राजस्थान में साल दर साल इसके रोगी बढते जा रहे हैं।

आनुवांशिक कारण भी प्रमुख रेडिएषन ऑनकोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ निधि पाटनी का कहना है कि महिलाओं में स्तन कैंसर और जननागों का कैंसर सबसे ज्यादा होता है। इन दोनों कैंसर के होने के कारणों में 20 फीसदी कारण आनुवांष्कि होते है। ऐसे में जरूरी है कि जिन परिवारों में स्तन कैंसर का रोगी रहा हो उन परिवार की महिलाओं 35 की उम्र के बाद साल में एक बार कैंसर रोग विषेशज्ञ से जरूरी जांच करवानी चाहिए। स्तन कैंसर रोग विषेषज्ञ डॉ पाटनी ने बताया कि साल में करीब 1500 स्तन कैंसर के रोगी चिकित्सालय में पहुंच रहे हैं। वहीं महिला जननागों के केैंसर के करीब एक हजार रोगी पहुंच रहे हैं।

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