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तीन रु वाला प्रोटीन का डिब्बा 780 रु का, दोनो हाथो से मरीजो को लूट रहे है डॉक्टर – MM NEWS TV

बिजनेस 23 May, 2017 03:59 AM
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MM NEWS TV / वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी की कलम से — आज मैं बताने जा रहा हूँ कि ब्रांडेड दवाओं के नाम पर डॉक्टर किस तरह मरीजो की जेब पर हर साल करीब 95 हजार करोड़ का डाका डाल रहे है । पहले तो यह बता देना उचित समझता हूँ कि चाहे जेनेरिक दवा हो या ब्रांडेड, दोनो का निर्माण ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 के अंतर्गत किया जाता है । जेनेरिक दवा का वही मापदंड है जो ब्रांडेड का होता है । जो लोग यह दलील देते है कि ब्रांडेड के मुकाबले जेनेरिक दवा घटिया होती है, उनसे बड़ा कोई पाखंडी नही है । जेनेरिक दवा अपने मापदंडो पर खरा नही उतरती है तो उसे अमानक या सपुरियस दवा कहा जाता है । ऐसी दवा के निर्माण करने वाले को केवल जेल की सजा के अलावा अन्य कोई प्रावधान नही है । जेनेरिक और ब्रांडेड दवा की कीमतों में हजार गुना तक का अंतर होता है ।

सवाल उठता है कि जब जेनेरिक दवा इतनी सस्ती है तो डॉक्टर इनको लिखते क्यो नही ? इसलिए नही लिखते क्योकि ब्रांडेड दवाओं के लिखने पर डॉक्टर को मोटा कमीशन, विदेश यात्रा, फाइव स्टार होटलो में लंच-डिनर और महंगे तोफे मिलते है । हिंदुस्तान में करीब 110 हजार करोड़ का औषधि व्यवसाय है । इसमें से मात्र 15 करोड़ की ही जेनरिक दवा बिकती है ।
आज अधिकांश डाक्टरो और क्लिनिक वालो ने अपने परिसर में ही दवा की दुकानें खोल रखी है । मरीजो को एंटीबायटिक, मल्टीविटामिन, सिरप आदि के नाम पर जबरदस्त तरीके से लूटा जाता है । मजे की बात यह है कि प्रोटीन और सीरप आदि के लिए ड्रग विभाग से लाइसेंस लेने की भी आवश्यकता नही है । नगर निगम से 12 रुपये का फ़ूड लाइसेंस आसानी से मिल जाता है । मात्र 3-4 रुपये वाले डिब्बे को 785 रुपये और 2 रुपये वाली सीरप की बोतल 70 से लेकर 110 रुपये तक की बेची जाती है । क्या इससे बड़ी और कोई लूट हो सकती है । पेट दर्द, खाँसी-जुकाम आदि के केप्सूल और टेबलेट का एक डिब्बा जिसमे एक हजार नग होते है, उसको क्लिनिक वाले प्रति नग दस रुपये का बेचते है । जबकि उस डिब्बे की कीमत होती है मात्र 100 रुपये । यानी 10 पैसे वाली टेबलेट के 10 रुपये । अर्थात 1000 गुना मुनाफा । इससे बड़ी और कोई डकैती हो सकती है ?
लूट की बानगी देखिये । मसलन, एंटीबायटिक के रूप में प्रयोग होनेवाली दवा एजीथ्रोमाइसिन सामान्य तौर पर 58.80 रुपये (दस टेबलेट) में मिलती है लेकिन इसी दवा का ब्रांडेड रूप 200 से 300 रुपए में उपलब्ध होती है । बुखार, खासी, जुकाम सहित अन्य आम बीमारियों के लिए जो जेनेरिक दवाएं मामूली कीमत में मिलती हैं, वही ब्राडेड के नाम पर कई गुना दरों पर बिक रही हैं। इसके बावजूद भी जेनरिक दवाइयों की बिक्री न के बराबर है। कमीशन के भारी खेल के चलते आसमान छूती ब्राडेड दवाओं की कीमत मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
जेनरिक दवाइयों की बिक्री न के बराबर ही है। जहां हर माह ब्रांडेड दवाइयों की बिक्री देश भर में 100 करोड़ से अधिक की होती है। वहीं जेनरिक दवाइयों की खपत महज 1.5 करोड़ रुपए के आसपास की ही है। शहर के 90 प्रतिशत दवा दुकानों में जेनरिक दवाइयां नहीं मिलती। इनकी सबसे ज्यादा बिक्री ग्रामीण इलाकों में है। गांवों में गरीबी ज्यादा होने के कारण वहां के डॉक्टर जेनरिक दवाइयों पर ही ज्यादा जोर देते हैं। जबकि इसके उलट शहरी इलाकों में ब्रांडेड दवाइयां ही लिखी जाती है। कारण एक ही है-डाक्टरो की लूटपाट ।
डॉक्टरों की मानें तो जेनेरिक दवाओं में भी करीब-करीब वही साल्ट इस्तेमाल होते हैं, जो ब्राडेड दवाओं में। बीमारी पर असर भी दोनों दवाईयों की सामान्य ही है। कीमतों में यह फर्क दवा कंपनियों, एमआर, दवा विक्रेताओं और दवा लिखने वालों के बीच कमीशन के खेल के चलते है।
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं की कीमत का खेल-
डाइक्लोफेनिक सोडियम 10 टेबलेट 2.29 25-29
पेरासिटामोल टेबलेट डाइक्लोफेनिक सोडियम 10 टेबलेट 1.24, 23-41
एजीथ्रोमाइसिन 10 टेबलेट 58.80, 308 रुपये
सेफिक्साइम आईपी 100 एमजी 10 टेबलेट 12, 120 रुपये
सेफालेक्सिन कैप्सूल 10 कैप्सूल 18, 162-165 रु
जेंटामाइसिन इंजेक्शन 2 एमएलएएमपी 2, 7-9 रु
एंटीनियोप्लास्टिक डोक्सोरूबिसिन इंजेक्शन 25 एमएल 212, 1725
पेक्लिटेक्सल इंजेक्शन 16.7 एमएल 339, 4022-4500 रु
एथेनोलोल आईपी 50 एमजी 14 टेबलेट 1.45, 40-45 रु
एटोरवेस्टेटिन आईपी 10 एमजी 10 टेबलेट 3, 104 रु
क्लोपिडोग्रेल आईपी 75 एमजी 10 टेबलेट 6, 215.50
हामरेंस एंड इंटोक्राइन ड्रग्स गलीमेप्राइड टेबलेट आईपी 2 10 टेबलेट 12, 117.40
साइकोट्रोपिक ड्रग्स
एल्प्लाजोलम आईपी 0.5 एमजी 10 टेबलेट 1.50, 25-26 रु
डाइजेपाम आईपी 5 एमजी 10 टेबलेट 1.30, 30-32 रु
ओलेन्जापाइम टेबलेट 10 टेबलेट 2.75, 38.50 रु
सेरट्रेलाइन टेबलेट 10 टेबलेट 3.50, 50-56 रु
नोट :: यह अलग-अलग ब्रांड की दवाइयों की कीमत है। इनमें अभी वैट नहीं जोड़ा गया है। वैट जोड़ने पर दवाओं की कीमत में और इजाफा हो जाएगा ।

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