राजनैतिक ब्लॉग

तो क्या अब राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा और गहलोत का सम्मान नहीं रहा ..??

राजनैतिक ब्लॉग 14 Oct, 2018 10:49 AM
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साल के अंत में होने वाले चुनावो के मद्देनजर सबकी नजरे राजस्थान में बनी हुई है क्योकि यहाँ बीते 15 सालो से दो चेहरे लगातार राज कर रहे है| पांच साल अशोक गहलोत कांग्रेस की तरफ से तो पांच साल वसुंधरा राजे भाजपा की तरफ से लेकिन अब ऐसा लग रहा है जैसे की राजस्थान की राजनीती से इन दोनों के दिन लद गए है| अब इनका आस्तित्व खत्म होता नजर आ रहा है| ऐसी कई सारी बातें हुई जो इस बात की तरफ इशारा करती है की अब गहलोत और वसुंधरा का वर्चस्व राजस्थान से खत्म हो रहा है|

वसुंधरा राजे

महारानी, राज घराने की बेटी जिसने एमपी छोड़कर राजस्थान का रास्ता चुना और भाजपा को 2003 में राजस्थान का रण जितवाया और सरकार बनाई और खुद बनी राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री| दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे अब इस बार फिर से चहेरा है और उनके नाम पर ही वोट मांगे जायेगे लेकिन कही ना कही वो दरकिनार हो गई है| जैसे ही चुनावी मौसम आया तो वसुंधरा अपनी गौरव यात्रा में निकल गई और अकेले संघर्ष करती नजर आई तो वही अमित शाह भी राजस्थान के अलग अलह क्षेत्रो में संघर्ष करते हुए दिखे| इस बार वसुंधरा राजे की नहीं सुनी जा रही है क्योकि वो काफी लम्बे समय से खुद की ही चला रही है| राजे चाहती थी की राजस्थान का प्रभारी नितिन गडकरी को बनाया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और प्रकाश जावडेकर को केंद्र से भेज दिया गया| इसके अलावा जावडेकर ने एक इंटरव्यू में कहा है की टिकट का बंटवारा हम करेगे, हम यानी की उनकी टीम और प्रदेशाध्यक्ष जिसमे मुहर लगेगी अमित शाह की| जावडेकर का इशारा साफा है की इस बार वसुंधरा का धिकार राजस्थान में उतना नहीं है जितना होना चहिये| वो चेहरा तो है लेकिन अब अधिकारी नहीं है| गौरव यात्रा में अकेले संघर्ष करना, गौरव यात्रा के बाद अचानक गायब हो जाना ये बाते कहती है की इस बार केंद्र नहीं चाहता की वसुंधरा सीएम बने लेकिन वो इन्हें हटा भी नहीं सकते है क्योकि वो पिछली बार का भूचाल देख चुके है| अध्यक्ष बाने से लेकर कई सारी ऐसी मनमानी है जो की वसुंधरा ने की और इसके चलते केंद्र उनसे खफा है| कहा जा रहा है की इस बार अमित शाह टिकट देगे और वो पने विधायको को जिताकर लायेगे और वो विधायक वसुंधरा राजे को अपना नेता नहीं चुनने वाले| इन सभी बातो से लगता है की इस बार वसुंधरा का वर्चस्व राजस्थान की राजनीती से खत्म हो गया है|

 

अशोक गहलोत

शांत, सरल निर्विवाद नेता जो की जमीन से उठा है लेकिन आज केंद्र में पकड रखता है| दो बार मुख्यमंत्री रहे गहलोत आज राजस्थान में खुद को प्रजेक्ट होते हुए नहीं देख रहे है| सचिन पायलट उनके सामने आ गए है| राहुल गाँधी ने उन्हें केंद्र में बुला लिया है| युवा नेता चिल्ला चिल्ला के सचिन का नाम ले रहे है, टिकट के लिए भी पायलट के घर में अधिक भीड़ देखी जा रही है, लोग युवा नेतृत्व चाह रहे है और ये सब बातें इशारा करती है की सचिन पायलट इस बार अशोक गहलोत को केंद्र में भेजकर ही मानेगे| राहुल गाँधी को भी लोकसभा चुनावो तक गहलोत की सख्त जरूरत है क्योकि उनके पास कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो ईमानदारी से उन्हें गाइड कर सके| इसीलिए अब अशोक गहलोत का वर्चस्व राजस्थान की राजनीति से खत्म कहा जा रहा है|

 

भले ही ये दोनों सीएम ना बने लेकिन चुनावो के बाद एक बड़ा भूचाल जरूर आएगा जिसके लिए राजस्थान तैयार नहीं है| उस भूचाल में दो नाम सामने आयेगे राजे और गहलोत|

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