राजनैतिक ब्लॉग

#मोदास डिजिटल योद्धा अब खुद बीजेपी के नियंत्रण में नहीं है वो कहीं और से नियंत्रित हो रहे है

राजनैतिक ब्लॉग 11 Oct, 2018 08:22 AM
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नवनीत चतुर्वेदी – स्वतंत्र  खोजी पत्रकार – आप सब को जून 2018 का अंतिम सप्ताह याद होगा जब अचानक से सोशल मीडिया पर माननीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्रोल किया जाने लगा था , प्राम्भिक तौर पर जो वजह सामने दिख रही थी वो लखनऊ के किसी अंतरधार्मिक विवाहीत जोड़े के पासपोर्ट मसले पर था।  

यहां मैंने कुछ स्क्रीन शॉट लगाए है और साथ ही सुषमा जी ने जो प्रत्युत्तर दिया उसके भी , ताकि आज इस प्रेस वार्ता में जो मैं कहना चाहता हूँ उसके संबंध में आप लोगों की मेमोरी एक बार ताजा हो जाए। 

Swaraj tweeted, “In a democracy difference of opinion is but natural. Pls do criticise but not in foul language. Criticism in decent language is always more effective.”

Sushma Swaraj

@SushmaSwaraj

निर्माण घृणा से नहीं, प्यार से होता है,
सुख-शान्ति खड्ग पर नहीं फूल पर चलते हैं,
आदमी देह से नहीं, नेह से जीता है,
बम्बों से नहीं, बोल से वज्र पिघलते हैं।
…….नीरज

Sushma Swaraj

@SushmaSwaraj

लोकतंत्र में मतभिन्नता स्वाभाविक है. आलोचना अवश्य करो. लेकिन अभद्र भाषा में नहीं. सभ्य भाषा में की गयी आलोचना ज़्यादा असरदार होती है.

दोस्तों एक सवाल पूछता हूं क्या यह संभव है कि कई सौ लोगों का हजूम एक जगह जुट कर किसी पुलिस के हवलदार को गालियां बक रहा हो और पूरा थाना मय थानेदार चुप बैठे हो , यदि हकीकत में ऐसा होता है तो यक़ीनन पूरा थाना ही लट्ठ ले कर उस भीड़ पर टूट पड़ता कि तुम हमारे स्टाफ को क्यों ऊलजलूल बक रहे हो , लेकिन यदि वो सब चुप है इसका मतलब कि उनकी मर्जी से वो भीड़ उस हवलदार को गालियां दे रही है या फिर वो थानेदार मय स्टाफ मजबूर है किसी अन्य कारण से उसकी हिम्मत नहीं हो रही कि वो भीड़ को रोक पाएं।
सुषमा स्वराज जी का यह प्रकरण आप इस मामूली से उदाहरण जो मैंने ऊपर दिया है इससे समझ सकते है या तो प्रधानमंत्री जी या पार्टी अध्यक्ष जी  की मंजूरी से उन्ही की पार्टी के डिजिटल योद्धा उर्फ़ #मोदास उन पर टूट पड़े थे या अब वो डिजिटल योद्धा अब खुद उनके नियंत्रण में नहीं है वो कहीं और से नियंत्रित हो रहे है। यहां सिर्फ 2 वजह हो सकती है सुषमा जी को ट्रोल करने के पीछे।
दोस्तों एक खोजी पत्रकार होने के नाते एक जिज्ञासा होती है मन में आखिर यह हुआ कैसे –क्या कहानी थी इस पूरे प्रकरण के पीछे –अतः इस ट्रोलिंग के पीछे क्या कारण रहे होंगे उनको मैंने समझने की कोशिश की है , और आज चूंकि शारदीय नवरात्र का पहला दिन है -हमारी संस्कृति में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है।  इसलिए मैंने आज का यह दिन चुना इस स्टोरी का खुलासा करने के लिए ताकि मैं आप मीडिया के मित्रो के माध्यम से यह देश तक संदेश पहुंचा पाऊं कि सुषमा जी को बेवजह ट्रोल किया गया और उन ट्रोल्स को अब सुषमा जी से माफ़ी मांगनी चाहिए जब उनको आज ये सच्चाई पता चलेगी आखिर क्या वजह थी ट्रोलिंग की।
1 . उक्त सब घटनाओं के पीछे अंतराष्ट्रीय कारण है , मैं पिछले 8 सितंबर से अब तक 8 प्रेस कांफ्रेंस कर चुका हूं और आज यह मेरी नवीं प्रेस वार्ता है {दिल्ली में पहली है } ,मैंने पूर्व में खुलासा किया था कि 2014 में बीजेपी की बम्पर जीत विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियो की मदद से हुई थी और वहां मैंने प्रशांत किशोर को मोसाद का एजेंट भी बताया था , आप इस स्टोरी को यहां इस लिंक पर पढ़ सकते है
2  जब आप इन दोनों लिंक्स को 5 मिनट समय दे कर पढ़ लेंगे तो यह समझ आ जायेगा ,आज मैं जो  बोल रहा हूं उसका आधार वहां से शुरू होता है
3 . पूरा मसला  अमेरिका , डॉलर का वर्चस्व ,  ऑइल इम्पोर्ट, और ईरान से जुड़ा हुआ है , अमरीका हर हालत में चाहता है कि ईरान से भारत तेल खरीदना बंद करे , ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए है  .  भारत ईरान से कई सालो से तेल आयात कर रहा है , ईरान से कूटनीतिक संबंध भी है , प्रधानमंत्री जी भी ईरान का दौरा कर चुके है , ईरान का तेल भारत को सस्ता सुलभ व आसान शर्तो पर उपलब्ध भी है जिसमे भारत तेल की कीमत डॉलर के बजाय रूपये में दे सकता है , बार्टर सिस्टम पर भी ईरान तेल देने को तैयार है , कहीं कोई विवाद किंतु -परंतु कुछ नहीं है।
4 . लेकिन जिन विदेशी ताकतों की मदद से 2014 का चुनाव मोदी जी ने जीता था ,अब वो अपने नमक का कर्ज मांग रही है और यही वजह है बार -बार हमारी विदेश नीति ढुलमुल हो जाती है और विदेश मंत्रालय एक तरह से खुद मोदी जी ही चला लेते है।  अब यहां आपस में टकराव है — आप यूं समझिये सुषमा जी एक वरिष्ठ नेता और उस बड़े कद की नेता रही है जब उन दिनों वर्तमान पीएम व पार्टी अध्यक्ष उनकी तुलना में बहुत छोटे कद के नेता हुआ करते थे।  2014 की जीत भाजपा की विजय न समझिये वो एक तरह से मोदी की जीत थी , मोदी ही भाजपा है यह आज का सत्य है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है।
पार्टी नेतृत्व हासिल करने और पीएम बनने की लालसा में ताबड़तोड़ विदेशी एजेंसियो का सहयोग लिया गया ,उनकी मदद से चुनाव जीत कर वो सत्ता में आ भी गए ,लेकिन अब हालत यह हो गई है कि किसको हां करें और किसको मना करे –अमेरिका को खुश रखें तो इजराइल नाराज ,दोनों को खुश रखें तो रूस नाराज , और रूस को खुश करे तो अमेरिका नाराज ,, वाकई बहुत दुविधा उतपन्न हो चुकी है , जो मित्र विदेश मंत्रालय की बीट सँभालते होंगे वो शायद समझ पाएंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।
5 . पार्टी का प्रचारतंत्र डिजिटल आर्मी जो पलक झपकते ही कुछ भी वायरल कर सकता है ,उसको डायरेक्शन कही और से विदेशी ताकतें देती है ,वही जिनकी मदद से इमेज मेकओवर ब्रांडिंग की गई थी , ब्रांड मोदी बनाया गया था , जिसकी कमान भले ऊपरी तौर पर यहां किसी घोषित चाणक्य प्रशांत किशोर ने ली हो या  पियूष पांडे हो या आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय जी हो या कोई और —उन सबकी सेंट्रल कमान सीआईए -मोसाद ब्रिटिश इंटेलिजेन्स के हाथो में है।
6 . 28 मई को ईरान के विदेश मंत्री मोहमद जावद जरीफ दिल्ली में सुषमा जी से मिलते है और उस दिन का सुषमा जी का बयान है , भारत सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ की नीतियों पर चलने को बाध्य है और किसी देश के कहे को माने वो हमे मंजूर नहीं
7 . इस बीच19 व  20 जून करीब से अचानक उन पर सोशल मिडिया के योद्धा टूट पड़ते है जो उन्ही की पार्टी के समर्थक है और पार्टी अध्यक्ष से ले कर पीएम वगैरह सब मौन है , कई दिन बाद दबे छिपे स्वरों में राजनाथ सिंह जी और नितिन गडकरी सामने आये सुषमा जी के समर्थन में , क्यूंकि ये तीनो नेता ही आज की वर्तमान भाजपा अर्थात मोदी -भाजपा की आँखों में खटकते है , 2019 में अगला पीएम कौन होगा जाहिर है भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सकता और गठबंधन में कोई भी मोदी को पीएम स्वीकार करेगा नहीं , ऐसे में ये 3 बड़े नाम हो सकते है जिनके चेहरे पर गठबंधन में पीएम पद की सहमति बन पाए , अतः एक सोची समझी प्लानिंग के तहत उच्च स्तर पर यह ट्रोलिंग की कार्यवाही हुई ताकि सुषमा जी की छबि धूमिल की जाए और साथ ही साथ उन पर यह दबाव बनाया जाए कि वो ईरान से तेल इम्पोर्ट मुद्दे पर शांत रहे ,जो निर्णय लेना है वो पीएम खुद ले लेंगे , जब सुषमा जी ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को मना किया, तब सेंट्रल कमांड से आये निर्देशों के तहत उनको ट्रोल किया गया।  तात्कालिक वजह लखनऊ पासपोर्ट वाला किस्सा बना यदि वो नहीं बनता तो कुछ और खड़ा होता लेकिन किसी न किसी बहाने उनको ट्रोल होना ही था।
8  27 -28 जून जिस वक़्त यह ट्रोलिंग अपने परवान पर थी उसी दौरान  अमेरिका की यूएन में राजदूत निकी हेली दिल्ली आती है और  सुषमा जी से और प्रधानमंत्री जी से मुलाकात करती है , उनके आने की चाहे जो भी दिखावटी वजह रही हो , उन्होंने ईरान से तेल आयत मसले पर सुषमा जी से बात की उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया कि हम अमेरिका के दबाव में नहीं आएंगे।  उसके बाद ट्रॉल्लिंग और बढ़ जाती है और अंततः जुलाई में करीब 3 तारीख को जब  राजनाथ सिंह व गडकरी जी  सुषमा जी  के समर्थन में आए , तब  कुछ लाज शर्म रखते हुए ट्रॉल्लिंग बंद हुई।
9  आज भी भारत सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है ईरान से तेल इम्पोर्ट को ले कर स्पष्ट नहीं है ,कभी हाँ कभी न  यही सुनने में आ रहा है , वास्तविक पिक्चर क्लियर 4 नवम्बर को हो पायेगी।
10.  अब आप लोग अपने सवाल पूछ सकते है।
मेरी अब तक की गई प्रेस कांफ्रेंस के विषयो को सामना [ शिवसेना मुखपत्र ] के 8 अक्टूबर संपादकीय कॉलम में कवर किया गया है –एक संक्षिप्त परिचय यहां मिल सकता है
सादर
नवनीत चतुर्वेदी
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