जयपुर

ख्वाजा साहब के 808 वें उर्स में शरीक होने पैदल आए अकीदतमंद

जयपुर 21 Feb, 2020 01:52 PM
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छड़ियों के क़ाफ़िले का दरगाह मौलाना साहब में किया गया इस्तक़बाल
रिपोर्ट: मोहम्मद तसलीम उद्दीन उसमानी
जयपुर। हिंद के वली हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के उर्स में हर मजहब और जाति के लोगों की दिलचस्पी रहती है। आम जायरीन के साथ ही मलंग व कलंदर भी अपनी अकीदत का इजहार अपने अंदाज में करने के लिए उर्स में शिरकत करने के लिए आते हैं। महरौली से रवाना होकर अकीदतमंद छड़ी और झंडों के कारवां लेकर चार दरवाजा स्थित मौलाना साहब की दरगाह पहुंचे।
सूफीपरंपरा को निभाते हुए करीब दो हजार मलंगों, फकीरों कलंदरों का कारवां यहां  की मशहूर हजरत मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह पर पहुंचा। अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज के  808  वें उर्स में शामिल होने के लिए ये कलंदर देश की विभिन्न दरगाहों से होते पैदल नंगे पैर जयपुर पहुंचे  और छड़ी मुबारक के जुलूस के रूप में यहां से कुछेक गुरुवार देर रात रवाना हुए ।  और बाकी लोग आज अजमेर के लिए रवाना होंगे। दरगाह मौलाना साहब पहुंचने पर दरगाह प्रशासन की ओर से दरगाह के सज्जादा नशीन जेनुल आबेदीन उर्फ मेहमूद मियां, बादशाह मियां, मुहीउद्दीन, खुसरो मियां के अलावा तारिक इनायती और छप्पन वारसी ने इनका इस्तकबाल किया।
इन जगहों से आए जायरीन
कलंदरों के इस काफिले में दाता मदार मकनपुर, तवक्कल मस्तान कर्नाटक,दाता हयात कलंदर,चिकमंगलूर के अलावा मुंबई, आसाम,बंगाल,हरियाणा,बिहार के अकीदतमंद कलियर शरीफ स्थित साबिर पिया, पानीपत स्थित बू अली शाह, मेहरोली स्थित बाबा कुतुबुद्दीन बख्तियार दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन ओलिया की दरगाहों से होते हुए दरगाह मौलाना साहब पहुंचे।
 जत्थों के रूप में आया कारवां
महरौली स्थित कुतुबउद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह के सज्जादानशीन सैयद जमीरउद्दीन ने बताया कि कलंदरों व मलंगों के इस बार कई जत्थे आए हैं। हर जत्थे में मुखिया होता है। और पूरे कारवां का अमीर इस बार हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह के मासूम बाबा को बनाया गया है। ये दल सबसे पहले नई दिल्ली स्थित महरौली शरीफ में एकत्रित होते हैं और वहां से जयपुर होते हुए अजमेर के लिए पैदल रवाना होते हैं।
सेवा में लगे रहते हैं लोग
रास्ते में जहां कहीं भी छडिय़ों का काफला गुजरता है वहां इन कलंदरों व मलंगों की आवभगत व सेवा में विभिन्न संस्थाएं और लोग लगे रहते हैं। इनके लिए मेडिकल सुविधा, नाश्ता, भोजन की व्यवस्था, और विश्राम की पूरी व्यवस्था की जाती है।
2000 लोग आए इस बार
इस बार छड़ी और झंडों का काफला लेकर आए लोगों की तादाद तकरीबन 2000 रही। खासतौर पर बांग्लादेश से भी इस बार 40 से अधिक लोग आए हैं।  हर जत्थे में 30 से लेकर 200 लोग तक होते हैं। जो अपने-अपने झंडे लेकर आते हैं।
हर व्यक्ति की होती है पूरी डिटेल
इस काफले के साथ आए हर व्यक्ति की पूरी डिटेल रजिस्टर में दर्ज रहती है। हर जत्था अपने लोगों को आई कार्ड इश्यू करता है। जहां से भी यह काफला गुजरता है वहां के प्रशासन और पुलिस से परमीशन के बाद ही आगे के लिए रवाना होता है।
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